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Telegram और Discord के सीक्रेट ग्रुप्स पर राजस्थान पुलिस की डिजिटल स्ट्राइक

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Lokjeewan Daily

28 सितम्बर 2026, 12:51 PM 3 मिनट में पढ़ें

Telegram और Discord के सीक्रेट ग्रुप्स पर राजस्थान पुलिस की डिजिटल स्ट्राइक

जयपुर। राजस्थान पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ जारी 'डिजिटल स्ट्राइक' पर पुलिस साइबर क्राइम विंग ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) साइबर क्राइम वी.के. सिंह के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) सुमित मेहरड़ा ने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे आधुनिक मोडस ऑपरेंडी (Modus Operandi) का पर्दाफाश किया। साइबर विंग की इस कार्रवाई के तहत अब तक 7,800 URL/प्रोफाइल, 15 हजार मोबाइल नंबर और 100 से अधिक डिजिटल डिवाइसेज ब्लॉक करवाए जा चुके हैं।

एसपी सुमित मेहरड़ा ने बताया कि साइबर अपराधी सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए एनक्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स और फर्जी पहचान का सहारा ले रहे थे:
Telegram और Discord के गुप्त व पेड ग्रुप्स: अपराधी टेलीग्राम और डिस्कोर्ड पर सीक्रेट (गुप्त) तथा 'पेड' ग्रुप्स और चैनल्स बनाकर इस घिनौने अपराध को अंजाम दे रहे थे। इन ग्रुप्स में शामिल होने के लिए क्रिप्टो या फर्जी वॉलेट्स के जरिए रकम ली जाती थी।
फर्जी पहचान (Fake Identity): फर्जी सिम और जाली पहचान पत्रों के आधार पर सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाकर ग्रुप में एंट्री ली जाती थी और डायरेक्ट पर्सनल मैसेज (DM) के जरिए सामग्री साझा की जाती थी।
क्लाउड स्टोरेज और ड्राइव लिंक शेयरिंग: सामग्री को सीधे भेजने के बजाय गूगल ड्राइव (Google Drive) और अन्य क्लाउड स्टोरेज प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर केवल उनके एक्सेस लिंक्स शेयर किए जा रहे थे।
कोडेड वर्ड्स और हैशटैग का खेल: इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे मुख्यधारा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर संदिग्ध कोडेड शब्दों (Code Words) और विशिष्ट हैशटैग्स का इस्तेमाल कर पहले संपर्क साधा जाता था, जिसके बाद मुख्य बातचीत को टेलीग्राम या डिस्कोर्ड जैसे प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट कर दिया जाता था।

एसपी मेहरड़ा ने स्पष्ट किया कि राजस्थान पुलिस की साइबर टीम उन्नत डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रेल (Digital Trail) की मदद से इन गुप्त नेटवर्क को ट्रैक कर रही है। NCMEC टिपलाइन और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर रिपीटेड ऑफेंडर्स (आदतन अपराधियों) की पहचान कर राज्य के चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों में विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर इस तरह के संदिग्ध हैशटैग या ग्रुप नजर आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें।

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